शनिवार, 4 अक्तूबर 2008

पतंग...


मैंने अपनी पतंग बहुत रंगीन बनाई थी...।
भरी दोपहर में मैं उसे उडाना चाहता था।
इच्छा थी कि एक बार उसे आसमानी हवा लग जाए, और वह गोल-गोल धूमती हुई,
उड़ जाए वहाँ, जहाँ आज तक कोई पतंग ना पहुचँ पाई हो।
बाज़ार का ध्यान उस वक्त नहीं था।
वह कौन सी उम्र होती है जब हमें बिकना ही पड़ता है... पतंग नहीं बिकती।
’पतंग तो उड़ेगी ही, आसमानी हवा कोई बंद थोड़ी हो जाएगी...’ जैसी बातों को बगल में दबाए,
हम बाज़ार में भाग रहे होते है।
फिर एक क्षण आता है जब पहली बार हमें एक रंग की ज़रुरत पडती है और हम अपनी पतंग का एक कोना फाड़ चुके होते है।
रंगों की ज़रुरत कभी खत्म नहीं होती... पतंग फटती रहती है।
बची रह गई पतंग की दो पतली लकड़ीयों से... बाद में हम आसमानी हवा की कल्पना करते हैं।
’पतंग को आसमानी हवा लगेगी और वह वहाँ उड़ेगी जहाँ कभी कोई पतंग नहीं पहुच पाई..’ जैसी बातें हमें बचकानी लगने लगती है.. जिनपर अब महफिलों में बैठकर हम जी भरकर हँसते है।

4 टिप्‍पणियां:

Malay M. ने कहा…

Oh God ... finally ... after making us wait for THREEEE months , there is a move over from 'Vidushak' ... great ... paani behataa hua , patang udati hui aur lekhak likhte hue hi acche lagate hain ...

Well ... absorbed this one ... ur usual fantastic touch ... kalpanaa ki patang se bhi oonchi udaan .. kuch rahasyavaad our kuch darshanshastra ... our bhaavna ka aisa jwaar ki 'aalochi' kism ke pathak ( mujh jaise ) bhi beh jaayein ... per ek baat kuch nayi lagi ... kavita hokar bhi yeh tukaant ya atukaant ki shaili se sammat nahi hoti ... ( kavita ka kaavya paramparaa se vidroh ?? ya phir ek nayaa prayogvaad ? ) ... dar-asal yah gadya-kaavya sa hai jise kavita main jaaye bina bhaavnaa ko prastut kar dene ki komaltam v anoothi shaili maana jaata hai ... ( on the second thoughts , this IS your style ... everyone who has seen your plays , particularly 'Peele scooter wala Addmi ' & 'Aisa kehte hain' , will swear by this ) ...

Anyways ... I am just too happy seeing this entry after such a long span of time , could not resist writing in here ( I had taken promise from myself not to write comments anymore after writing last one in your 'Dayabai' write up ... everytime , after posting my comment , donno why but I feel so embarressed ... ) ...

Wishing you all luck & success ...

विकास कुमार ने कहा…

कल रात बोर होते होते जूनो फ़िल्म का ये गाना सुन रहा था. "A Well Respected Man"
आपकी इस कविता के सन्दर्भ में काफ़ी प्रासंगिक लगी. सोचा कह दूँ. सो कह रहा हूँ. :)

आपकी कवितायें लंबे अरसे से पढ़ रहा हूँ. शायद तब से, जब से आपने अपना ब्लॉग बनाया. कभी टिपण्णी करने का साहस ना हुआ. वैसे भी आपके विचारों की कद इतनी ऊंची है, कि मेरे शब्द वहां पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं. आशा है आप इसी तरह लिखते रहेंगे. :)

swati ने कहा…

sach hai....bahut hi sundar aur gehri soch ......bahut hi prabhavit kiya aapne....ab se niymat padhungi aapko

Pratibha Katiyar ने कहा…

apratim...

आप देख सकते हैं....

Related Posts with Thumbnails