
बल...
बल क्या शब्द है?
कैसे इसका अनुभव हो !!!
बल नहीं समझा, तो क्या मैं निर्बल हूँ !!
निर्बल.. रक्षा जानता है।
अरे हाँ! .. रक्षा,
रक्षा करते रहने का एक संस्कार है।
'किससे'.. शब्द उसमें नगण्य है।
रक्षा समझ में आता है.. पर बल क्या है?
मुझमें बल है कि मैं...
इतना वज़न एक बार में उठा सकता हूँ!!!
नहीं, बल शब्द का अर्थ इससे पूरा नहीं होता।
कुछ और जो हमें बल देता है।
और जब भी बल होता है...
जैसे- कुछ कर देने का ...
कह देने का...
रह या सह लेने का...
तब भी, उससे भी कहीं अधिक बल...
छूटा रह जाता है,
.....'पाया जा सकता है'-
की आशा लिए।
इसका मतलब...
'बल एक शब्द है...,
जिसे पूरा अनुभव करने का बल,
हमेंशा सामने छूटा पड़ा रहेगा,
उसे उठा लेने का बल हमारे पास
कभी नहीं होगा।'
इसमें 'उठा लेना'..
शब्द नगण्य है।
1 टिप्पणी:
father's day gifts online
father's day cakes online
father's day flowers online
एक टिप्पणी भेजें