सोमवार, 25 फ़रवरी 2008

'शक्कर के पांच दाने'



शक्कर के पाँच दाने जादू हैं।
जिनके पीछे चीटियाँ भागती हैं।


दो दानों पर पहुँचती हैं,
तीन आगे दिखते हैं।
भागकर बाक़ी सारी चीटियों को बुला लेती हैं।


पाँचवे दाने पर पहुँच जाती हैं,
मगर पीछे के दो दानों को भूल जाती हैं।
फिर वही दो दाने आगे मिलते हैं।
वो जादू में फस जाती हैं,
और घूमती रहती है।


ये खैल कभी खत्म नहीं होता।
क्योंकि चींटियाँ तलाश रहीं हैं, खेल नहीं रही।
जादूगर एक है जो खैल रहा है।

2 टिप्‍पणियां:

Keerti Vaidya ने कहा…

VERY NICE

आनंद कुमार द्विवेदी ने कहा…

केवल एक स्माइली चलेगी ? :)

आप देख सकते हैं....

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